• 04 March 2026

    साथ साथ

    डगर

    0 4

    राह नहीं देखता राह नहीं पूछता।

    साथ साथ चल रहे,या अकेले।


    चलना तो तुमको,बदलना तो तुमको।

    रुकना तो तुमको, मंजिल पाना तुमको।

    राह नहीं जानता,राह नहीं बखानता।


    तुम्हारा है योजना, तुमको है सोचना।

    तुमको है पहुंचना, धीरे चलना या दौड़ना।

    राह नहीं सिखाता, राह नहीं दिखाता।


    तुम्हारा इसमें हित, हित ही है संगीत।

    हित का करता गान, चल हरदम मीत।

    राह नहीं सुनाता, राह ना गुनगुनाता।


    गिरधारी लाल चौहान

    सक्ती छत्तीसगढ़







    गिरधारी लाल चौहान


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