• 22 March 2026

    एक झलक

    अपनापन

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    अपने पन की एक झलक।

    हर जगह बिखरा रहता है।

    कोई समेटता जाता उसको।

    कोई छोड़ता रहता है।

    अपने पन से दूर न कोई।

    अपना पन जागी न सोई।

    हर पल तुम्हारे साथ साथ।

    कोई इसे समझता रहता है।

    अपना पन कोई पेड़ नहीं।

    अपना पन कोई डाल नहीं।

    अपना पन तो है एक रिश्ता।

    रिश्ते में बंधा वह रहता है।

    धरा में न खोजो उसको।

    और नहीं गगन में पाओगे।

    जी



    गिरधारी लाल चौहान


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