4अपनापन दिखाया नहीं जाता।
अपनापन बताया नहीं जाता।
इसका एहसास हो जाता है।
अपनापन चिल्लाया नहीं जाता।
कैसे इसे दिखाओगे तुम।
क्या कहकर चिल्लाओगे तुम।
क्या कोई इसको मान लेगा।
अपनापन भुलाया नहीं जाता।
कैसे भूलेगा भाव इसका।
सुखद होता है छांव इसका।
दुख का तो नाम ही न लो।
अपनापन ठुकराया नहीं जाता।
अपनापन आकाश से नहीं आते।
अपनापन जल मे उत्पन्न नहीं होते।
अपना पन का कोई पेड़ नहीं होता.।
अपनापन लौटाया नहीं जाता।
गिरधारी लाल चौहान
सक्ती छत्तीसगढ़