• 07 June 2026

    समझने की खबर

    अब समझा

    0 1

    समझने की खबर, हो रही इधर उधर।

    अब मेरा मन क्या करे, हर ओर नजर।


    मुस्कुरा भी लेता हूं, जब बहाना मिलता।

    खरीद भी लेता उसे, बाजार में बिकता।

    जहां बिके दामों में, ऐसा गाँव न शहर।


    अपमान भी लगता है, कोई आके समझाए।

    उम्र का जो दौर है, बहुत कुछ यह आड़े आए।

    हर उम्र नहीं देता है, इस तरह का अवसर।


    कहाँ चौथेपन में अगर, काले बाल का संदेश।

    और कहा जाए आज ही, जाना है दूर देश।

    सुनकर ऐसे लगता है, कहने वाला है विषधर।



    गिरधारी लाल चौहान

    सक्ती छत्तीसगढ़



    गिरधारी लाल चौहान


Your Rating
blank-star-rating
Sorry ! No Reviews found!