6माँ भारती : सनातन दिव्य चेतना और ईश्वरीय विराट ऊर्जा
लेखक
विद्यावाचस्पति प्रो डा रामकृष्णादादा महाराज पाटील
ईश्वर अनंत ब्रह्मांड में व्याप्त उस दिव्य चेतना और ऊर्जा का केंद्रबिंदु है, जिससे समस्त सृष्टि का संचालन होता है। जब सृष्टि के संतुलन और संरक्षण के लिए ब्रह्मा, विष्णु और शिवतत्त्व की दिव्य शक्तियाँ प्रकट हुईं तब धर्म और अधर्म किसी संकीर्ण सीमा में बंधे हुए तत्व नहीं थे। धर्म वह शाश्वत चेतना है जो सत्य, करुणा, न्याय, सदाचार और सृजन का संरक्षण करती है तथा अधर्म वह नकारात्मक शक्ति है जो जीवन, सत्य और संतुलन को विनष्ट करने का प्रयास करती है।
ईश्वर युग-युग में विभिन्न नामों, रूपों और अवतारों के माध्यम से इसी नकारात्मकता का विनाश तथा धर्मचेतना की पुनर्स्थापना करता रहा है। भारतभूमि इस सनातन दिव्य परंपरा की पुण्यभूमि रही है। हजारों वर्षों के इतिहास में अनेक संकट आए, अनेक शक्तियों ने इसकी सांस्कृतिक और आध्यात्मिक चेतना को नष्ट करने का प्रयास किया लेकिन माँ भारती की आत्मशक्ति कभी समाप्त नहीं हुई।
माँ तुळजाभवानी की दिव्य प्रेरणा से छत्रपति शिवाजी महाराज के रूप में राष्ट्ररक्षा, स्वाभिमान, धर्मसंरक्षण और लोककल्याण की विराट चेतना प्रकट हुई। माता जिजाबाई ने उसी चेतना को संस्कार, साहस और राष्ट्रनिष्ठा के रूप में शिवरायों के अंतःकरण में प्रतिष्ठित किया। इसी प्रकार गुरु गोविंद सिंह जी ने अपने तप, त्याग, शौर्य और गुरुतत्त्व की प्रखर ऊर्जा से अन्याय के विरुद्ध संघर्ष की अद्भुत ज्योति प्रज्वलित की।
भारतभूमि पर जब-जब संकट के काले बादल मंडराए तब-तब संत, महात्मा, ऋषि, तत्वज्ञानी, वीर और महापुरुष इसी भूमि की गोद से प्रकट हुए। यह केवल इतिहास की घटना नहीं बल्कि सनातन चेतना की सतत अभिव्यक्ति है। माँ भारती की विरासत किसी एक नाम, संप्रदाय या सीमित पहचान में बंधी हुई नहीं है। यह सत्य, धर्म, अध्यात्म, करुणा, ज्ञान, तप, त्याग और मानवकल्याण की अनंत परंपरा है।
धर्म को किसी संकीर्ण उच्चारण या सीमित पहचान में बाँधा नहीं जा सकता क्योंकि धर्म मूलतः जीवन को सत्य और प्रकाश की ओर ले जाने वाली शाश्वत चेतना है। यह अनंत ब्रह्मांड में व्याप्त दिव्य तेज के समान है। ईश्वर की लीला अनंत है और उसकी चेतना युग-युग में विभिन्न रूपों में प्रकट होती रहती है।
अतः हमें बाहरी भेदों से ऊपर उठकर उस विराट ईश्वरीय तत्व की शरण ग्रहण करनी चाहिए जो समस्त सृष्टि में एक ही चेतना के रूप में विद्यमान है। माँ भारती की जय हो। माँ तुळजाभवानी की दिव्य शक्ति का जयघोष हो। माहूरगढ़ निवासिनी माँ रेणुका की कृपा बनी रहे और माँ महालक्ष्मी की मंगलमयी ऊर्जा समस्त विश्व में शांति, धर्म और सद्भावना का प्रकाश फैलाए।
ॐ तत्सत्। 🚩🌹