• 23 August 2026

    बुंदेली दोहे प्रतियोगिता -282

    bundeli doha pratiyogita -282

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    बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-282(22.8.2026)
    प्रदत्त शब्द-करयाई (कमर)
    संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
    आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़
    प्राप्त प्रविष्ठियां
    1
    टूटत है जो पेट सें,करयाई झुक जात।
    भर ज्वानी में बेइ अब,बूड़े घाॅंइॅं दिखात।।
    -आशाराम वर्मा 'नादान',पृथ्वीपुर
    2
    करयाई पे चढ़ चले,राम लखन बलवान।
    मिलन गये सुग्रीव से,लिए साथ हनुमान।।
    -प्रमोद मिश्रा,बल्देवगढ़
    3
    करयाई जसुदा चढ़े,श्याम आज मुस्कायँ।
    तीन भुवन के ‌देवता,लीला खूब रचायँ।।
    -सुभाष सिंघई,जतारा
    4
    करयाई बिच करधनी,कंठ मोतिया माल।
    पग पैजनिया की छनक,ठुमक चले नँदलाल। श।
    -आशा रिछारिया,निवाड़ी
    *5*
    करयाई में खोंस कें,गुच्छा घुँघरू दार।
    निकरी हैं गोरी धना,मौं पे घुँघटा डार।।
    -अनुराधा गर्ग दीप्ति, जबलपुर
    6
    कालनेमि करयाइ में,हनी हूक कैं लात।
    हनूमान हातन भई,कालनेमि की मात।।
    -प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
    7
    करयाई शहरन मुड़ी,मैनत उतै बिलात।
    गाँव वसाहट छोड़ती, बेकारन की पाँत।।
    -लल्ला सुरेन्द्र सिंह चौरसिया 'लल्लन मुनि',महाराजपुर
    *8*
    नैंन जोत धीमी परी, उर तागत मरयाइ।
    निगत कपत लठिया लयें,टेडी भ‌इ करयाइ।।
    -भगवान सिंह लोधी'अनुरागी',हटा
    9
    देह खड़ेरा हो गई,गुड़या गइ है चाम।
    करयाई टेंड़ी भई,अब तो भज ले राम।।
    -तरुणा खरे'तनु',जबलपुर

    10
    भडयाई करबै गये, उलटो पर गव दाव।
    करयाई सबरी छुली,भडया कड गव नाव।।
    -विशाल कड़ा 'मांझी',बडोराघाट
    11
    बज्जुर सी छाती बनी, लचक गई करयाइ।
    धरती पूत किसान की,किस्मत है दुखदाइ।।
    -अजित जैन'जलज',टीकमगढ़
    12
    भग कें गई ती मायकें, भइया सें लरयाइ।
    मैंनें हँसकें पूँछ लइ, टोडारी करयाइ।।
    -अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
    13
    आइँ कुआ की पाट पै,खेप भरन भौजाइ।
    खेंचत भरी कसेंड़िया,लचक र‌ई करयाइ।।
    -प्रभुदयाल श्रीवास्तव 'पीयूष,टीकमगढ़
    14
    जीवन में रखियौ सदां,करयाई कौ ध्यान।
    सूदे सूदे रौ चलत,मन में लो जा ठान।।
    -वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
    15
    का खाबें का छोड़ दें, समझ न आबै भाइ।
    मैंगाई की मार सें,टूट गई करयाइ।।
    -डॉ.देवदत्त द्विवेदी बड़ामलहरा
    16
    मँहगाई की मार नै, दइ करयाई टोर।
    सत्तर की शक्कर बिकैं,मचौ देश में शोर।।
    -एस.आर सरल', टीकमगढ़
    17
    इक दूजे के सोह रय, करयाई पै हाथ।
    सावन झूला झूल रय,राधा-मोहन साथ।।
    -गोकुल प्रसाद यादव, नन्हींटेहरी
    18
    करयाई टूटी धरी, महँगाई की मार।
    कैसें होवै अब गुजर,करे गरीब बिचार।।
    -श्यामराव धर्मपुरीकर,गंजबासौदा
    19
    करयाई लचकी हती. कुब्जा बिकल कुरूप।
    भई कृपा श्री कृष्ण की.पायौ रूप अनूप।।
    - रामानंद पाठक'नंद' नैगवां



    राजीव नामदेव राना लिधौरी


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