2लगने लगे तुम चाँद की तरह।
देखने लगा मैं चकोर की तरह।
ये बात पहले उसी तरह थी।
जैसे किसी मन बेवजह थी।
अब सताने लगा तुम्हारी विरह?
खोजता फिरता हरपल।
तुम्हें जब देखो नजर।
अब जरुरी हो चला प्यार जिरह।
विवश हम तब भी नहीं थे।
विवश हम आज भी नहीं हैं।
बस खोजिये मत इसकी वजह।
गिरधारी लाल चौहान
सक्ती छत्तीसगढ़