0बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -283
दिनांक 29/8/26
विषय-कटर/कठर (कटहल)
प्राप्त प्रविष्ठियां:-
1
उमर कटर की है बहुत, फलों की देत सौगात।
बड़े बड़े फल देख कें, खुशी हमें मिल जात॥
-सुभाष बालकृष्ण सप्रे,पुणे
2
अटर कटर में भौत है,लगत मसालों तेल।
खातन में नोनी लगे ,अनगिन लुचई पेल।।
-डॉ.आर.बी.पटेल 'अनजान',छतरपुर
3
कटर गजानन प्रिय लगै, गजउ चाव से खायँ।
कहत तमिल में मुक्कनी, देवन भोग लगायँ।।
-अमर सिंह राय,नौगांव
4
देखन में जैसो लगे,गुन में साजो मान।
जीमैं जौ रुच रुच कठर,बेइ बनत बलबान।।
-विद्या चौहान,फरीदाबाद
5
कटर बड़ी स्वादिष्ट है, पोषण सें भरपूर।
ई में है जो फाइबर, सुगर करत है दूर।।
*
-डॉ.देवदत्त द्विवेदी,बड़ामलहरा
6
औषधि में फल पनस है, खबत साग-आचार।
फरत कटर है पेड़ पै, कटहल कत संसार।l
-लल्ला सुरेन्द्र सिंह चौरसिया 'लल्लन मुनि',महाराजपुर
7
कटर कीमती पेड़ है,देत जमानत मोइ।
बिटामिन्सखूबॅइॅ भरौ,एबीसीजो होइ।।
-शोभाराम दा॑गी 'इंदु', न॑दनवारा
8
नरम कलइयन की धना,मुइयां सूकी जाय।
कैसें कटतई जो कटर, सूजे नहीं उपाय। ।
-आशा रिछारिया,निवाड़ी
9
कटर कटीली कौंयरी,काटत में रसयात।
साग बनाउत अटर है, सबै शौक सें खात।।
-के एल साहू(सुदर्शन),बडामलहरा
10
सबजी कटर की न मिलै,गाँव हाट में रोज।
जाव शहर में देख लो,बढ़िया हुइये भोज।।
-वीरेन्द्र चंसौरिया, टीकमगढ़
11
लगत कटर- सी जिंदगी,बीजा गूँदा माल।
समय कतर कैं डार दे,हड़िया करे हलाल।।
-सुभाष सिंघई,जतारा
12
कटर लगा लो मेंड़ पै, हो जै हौ धनवान।
खावे खों कटहल मिलें, हुइयै पुन्य महान।।
-अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
13
कटल काटबे बैठ गइ, हाथन तेल लगाय।
तरकारी नोनी बनी, चाट चाट के खाय।।
-डॉ रेणु श्रीवास्तव,भोपाल
14
साग कठर की जब बनै, तेल मसालो डार।
सबरे घर के खात हैं, लै लै खें चटकार।।
-तरुणा खरे'तनु',जबलपुर
15
फूल बिना फल देत है, जेइ वीर की आन।
साँसे जोधा कटर से, करें न पैल बखान।।
-अरविन्द श्रीवास्तव,भोपाल
16
कठर लगो हो जे घरे, वारे-न्यारे होत।
हो गरीब खाँ फायदो, देत कमाई भोत।।
-श्यामराव धर्मपुरीकर,गंजबासौदा
17
अटर करे की है कटर. बिना अटर बरबाद।
जो ढंग सें कर है अटर. पा है सेहत स्वाद।।
-रामानन्द पाठक नन्द, नैगुवां
18
गोरी गुट्टा में धरें,कटर बजारे जात।
दस रुपया को एक ठउ,बेंच रही मुस्क्यात।।
-प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़
19
मिलत छांयरौ उर हवा,जियत और के हेत।।
तिरकारी खों फल कठर, सूखें लकड़ी देत।।
-भगवान सिंह लोधी "अनुरागी",हटा
20
कटर कटर सैं नहिं कटै,कटर-कटर ये होय।
कट-कट खातन में करै,कीमत सुन सब रोय।।
-प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
©संयोजक- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजन- जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़