• 17 September 2026

    राह में

    अब समझा

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    राह में कांटे राह में फूल।

    राह में पत्थर राह में धूल।

    मिलते कभी नहीं मिलते.

    सुख देते और कभी सूल।

    मन भाते उदास बनाते।

    अजब गजब इनके उसुल।

    राही ठिठके चले हटके।

    दिख जाते इसके डाल।

    अपना सा पराया सा।

    लगते महत्व लगते फिजूल।


    गिरधारी लाल चौहान

    सक्ती छत्तीसगढ़



    गिरधारी लाल चौहान


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