7बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -286
दोहा दिवस दिनांक 19.9.2026
प्रदत्त शब्द #कारौ(काला)
संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़
प्राप्त प्रविष्ठियां-
1
कारौ रँग नँदलाल कौ,राधा उजली देह।
ज्यों बिजुरी घनश्याम सँग,मिल बरसावे मेह।।
-आशा रिछारिया,निवाड़ी
2
राधा रंग कारौ नहीं,,कान्हा मोरौ श्याम।
बरतन छवि नाहीं बनें,,लखत सुबह-ओ- शाम।।
- प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
3
ऊधव से कत ग्वालिनी,ज्ञान देव जिन आप।
तुमरो मन कारो लगे,बढ़त हिदय संताप।।
-डॉ. रेणु श्रीवास्तव,भोपाल
4
लीलाधर घनश्याम की,लीला कही न जाय।
कारौ रूप बनाय कें,जग लीनों भरमाय।।
*- डॉ.देवदत्त द्विवेदी,बड़ामलहरा
5
तन कौ कारौ होय तौ,ऊँ मैं नैयाँ खोट।
मन कौ कारौ देत है,जीवन भर खाँ चोट।।
*-विद्या चौहान, फरीदाबाद
6
कारौ कै-कै कृष्ण को, गोपीं देत चिढ़ाय।
छुप कैं कृष्ण गुलेल सें,मटकी देत गिराय।।
-अमर सिंह राय नौगांव
7
कारौ धौरौ कर रई, नेतन की जा फौज।
जनता सबरी पिस रई, नेता कर रय मौज।।
-श्यामराव धर्मपुरीकर,गंजबासौदा
8
रामदई ऐसे धरे, बिघनी, नमकहराम।
कारौ-पीरौ कर रये, गड्ड-गड्ड सब काम।।
-डॉ.सुनील त्रिपाठी निराला,भिंड
*9*
धब्बा कारौ जौंन के,मांथे पै लग जात।
गंगा जल सें नइॅं धुबत,नीचट सांसी बात।।
*-भगवान सिंह लोधी'अनुरागी',हटा
10
कारौ मौकौ आदमी,सुनदर छबि पा जाय।
फिर का कानें रामधइ,खूबइ इजजत पाय।।
*-वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
11
कारौ काजर घी फिटे,सज्जन को सँग पात।
आँखन में रैबें मिले,लोग देख मुस्कात।।
*-सुभाष सिंघई,जतारा
*12*
कारौ हरि कौ रंग है,पीरौ है परिधान।
धरें सुदर्शन चक्र हैं,पालें सकल जहान।।
* -अमिताभ गोस्वामी,भोपाल
13
काजर सें कारौ रहै, जो कउँ लगै कलंक।
जीवन भर बौ सालबै,बिच्छू जैसौ डंक।।
*-रामानन्द पाठक नन्द',नैगुवां
14
गोरे गोरे गाल पै,तिल कारौ जो होय।
भौंतउ उमदा छबलगे,नाक नक्शा मोय।।
*-शोभाराम दा॔गी इ॑दु न॑दनवारा
15
कारौ बदरा देख कैं,घबरा रहौ किसान।
सरे जात उर्दा तिली,गम्म खाव भगवान।।
*-एस आर सरल,टीकमगढ़
16
कारौ लल्ला नंद कौ, नाव धरौ घनश्याम।
गोरी पीरी राधिका,धरौ लाडली नाम।।
* -अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी