• 26 September 2026

    ओ आगे

    अब समझा

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    मेरे हिसाब से, ओ आगे।

    देखे समय और, फिर जागे।

    अगर है उसमें इतनी बात।

    नहीं भटकेगा दिन रात।


    आगे जाएगा ‌‌,आगे जाएगा।

    अपनी लक्ष्य तक, पहुंच जाएगा।

    उसका अंधेरा, मिटके रहेगा।

    कर लिया है जिसने शुरुआत.।


    अपने दम में, होता है दम।

    मिट जाता है, मन का भरम।

    भरोसा उसकी, अलग है होती।

    मिलता उसको है, नव प्रभात।


    उसके पीछे, दुनियां है चलती।

    चल चल करके, खुद को बदलती।

    देखने से भी, समझ आ जाता।

    जो अब तक था अज्ञात.।


    लोग भी उसको, लोहा माने।

    उसके जैसे ही सब ठाने।

    बन गया ओ सबका सयाना.।

    जो दूसरों से खा रहा था मात।


    जीवन सुख दुख होते अन्त।

    कभी न मानो इसे अनंत।

    आता समय खत्म है होता।

    जब तुम उसका ही करोगे बात।



    गिरधारी लाल चौहान


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