• 03 October 2026

    बुंदेली दोहा प्रतियोगिता 288

    bundeli doha pratiyogita

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    बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -288

    विषय-पुरखा (पितर)
    दिनांक 03-10-2026

    संयोजक-राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
    आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

    प्रविष्ठियां-

    1
    पुरखा आऐ डेवड़ें,उनें न समजौ काग।
    दूद भात कौ भोग दो,खुलजें सबके भाग।।
    -अमिताभ गोस्वामी,भोपाल
    2
    अपनइं पुरखा पूजवे ,कउअन पानी देत।
    नइं जियत दईं गांकरें, मरें लगा रय हेत।।
    -सियाराम अहिरवार ,टीकमगढ़
    3
    को कत है पानी दएँ, पुरखा मुक्ती पात।
    जो लरकन के राज में,कलप-कलप मर जात।।
    -अमर सिंह राय नौगांव
    4
    पुरखा जिउँ से यादकर,देवँ उनै सम्मान।
    मान उनै आदर्श भी,करो अरघ जलदान।।
    -सुभाष सिंघई,जतारा
    5
    जिंदा भूकन मार कें,जिनखों रोज सतात।
    उनखों पुरखा जान कें,पूड़ी खीर ख्वात।।
    -अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
    6
    सबके पुरखा खुश रहें,खुशी रहे परिवार।
    परमपिता परमातमा,बिनती बारमबार।।
    -वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
    7
    पुरखा कुल की नींव हैं,संतानन की आस।
    उनकी पावन याद से,भरत हिय में प्रकाश॥
    -महावीर पूर्णिया
    8
    सौप वसीयत हैं गये, पुरखा सुत के नाम।
    पितृ मिलन कर श्राद्ध से,विधिवत करें प्रणाम।।
    -लल्ला सुरेन्द्र सिंह चौरसिया,महाराजपुर
    9
    मंदिर बन ग‌व राम कौ,पुरखा सुन हरसांय।
    मंगल गायन कर रहे,और सुमन बरसांय।।
    -भगवान सिंह लोधी 'अनुरागी',हटा
    10
    पुरखा आये दूर से,दैबे ऐन अशीष।
    इनकी सेवा से मिलत,किरपा श्री जगदीश।।
    -विशाल कड़ा'मांझी',बडोराघाट
    11
    पुरखन खोँ पानी दियौ,जीकेँ जैसे होयँ ।
    जियत करौ तुम जानियौ, मरें न प्यासें रोयँ ।।
    -प्रमोद मिश्रा,बल्देवगढ़
    12
    कुल के पालनहार हैं,करौ सदां सम्मान।
    पुरखा दें आशीष तौ, हो जैहै कल्यान।।
    -प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
    13
    अपनें पुरखों की करौ,रीत नीत कौ ध्यान।
    उनके पुन्न प्रताप सें,हम सबकौ कल्यान।।
    -देवदत्त द्विवेदी बड़ामलहरा
    14
    जबसें जे पुरखा लगे,रोज कड़त कागौर।
    माल सूंट रय हूंक कें,हतो न जिनकौ ठौर।।
    -प्रभुदयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़
    15
    पितरन पानूँ देत हैं, और कराबें भोज।
    देत दुआ परिवार खों,खूब उजरबै जोत।।
    -रामानन्द पाठक नन्द,नैगुवां
    16
    जीते जी तरसात है,पानी खों औलाद।
    छप्पन बिंजन देत हैं,पुरखा बनबे बाद।।
    -तरुणा खरे'तनु',जबलपुर
    17
    भूल-बिसर नैं भूलियौ,पुरखन कौ यैसान।
    पुरखन सें हम-आप हैं,पुरखा हैं भगवान।।
    -गोकुल प्रसाद यादव नन्हींटेहरी
    18
    भौतइ पावन दिन करय,क्वांर मास के खास।
    इनमें पुरखा आत हैं,ले पानी की आस॥
    -सुदेश सोनी,ललितपुर
    19
    पुरखा पूजें पक्ष में, कागोरा नित देत।
    पुरखन के आशीष सें,साधें सबको हेत।।
    -श्यामराव धर्मपुरीकर,गंजबासौदा
    20
    पुरखा अपनें देवता, हम हैं उनके अंश।
    उनके पुन्न प्रताप सै, हरौ भरौ सब बंश।।
    -एस आर सरल,टीकमगढ़
    21
    अपनै अनुभौ ज्ञान सें,पुरखा कै गय बात।
    ब्याद बिबूचन आँय तौ,हिम्मत सैं द्यो मात।।
    -विद्या चौहान,फरीदाबाद
    © संयोजक- राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'



    राजीव नामदेव राना लिधौरी


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