• 14 October 2026

    निर्धारित

    कर्तव्य

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    जो कर्तव्य है निर्धारित।


    कर्तव्य पूर्ण करते हुए।

    बढ़ते जायें।


    इससे खुशियाँ मिलती।

    कार्य भी समाप्त होते।

    अधूरे कर्तव्य वाले ही।

    यहाँ वहाँ जग में रोते।


    ऐसे लोगों को पूजे दुनियां।

    ऐसी पहचान पायें।


    अपमानित भी होते है।

    सिर झुकता है।

    ऐसे लोगों को कोई।

    नहीं पूछता है।


    नतीजा हमारा सबके।

    अनुकुल बनायें।


    कर्तव्य बोध जब आता है।

    जीवन को जगा जाता है।

    इसके पीछे मानव।

    जो चाहिए वह पाता है।


    इस भावना के लिए

    मन में घर बनायें।


    ऐसे लोगों के समूह से।

    दूर होते जायें।




    गिरधारी लाल चौहान


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