1बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -291
दिनांक 24.10.2026
प्रदत्त शब्द #कल्लू
संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़
प्राप्त प्रविष्ठियां:-
1
टारौ नहिं मन सैं टरै, लागो बा सें नेह।
लीलाधर लीला रचै,कल्लू जाकी देह।।
- प्रदीप खरे 'मंजुल' टीकमगढ़
2
गोरो चिट्टो बो धरो, जीको कल्लू नाम।
राजकुमारी नाम की, करें खेत में काम।।
-तरुणा खरे'तनु' जबलपुर
3
मेघ रंग श्रीकृष्ण थे,श्याम सलौने राम।
कारे येंसइ रंग जो,कल्लू रखवैं नाम।।
-लल्ला सुरेन्द्र सिंह चौरसिया 'लल्लन मुनि',महाराजपुर
4
सूपनखा कल्लू हती, गई राम के पास।
भेस बदल कर आपनों, करी ब्याव की आस।
-रामानन्द पाठक नन्द,नैगुवां
5
कैसउ कल्लू काबरी,घर भीतर तौ आय।
क्वांरे हाड़न खों गुरू,हरदी भर चड़ जाय।।
-डॉ.देवदत्त द्विवेदी,बड़ामलहरा
6
सत्तर की उम्मर भई,कल्लू डाइ लगायँ।
कूका दै रव मरगटा,भपका तोउ बनायँ।।
-एस.आर. सरल,टीकमगढ़
7
तन के जो कल्लू मिले, मन के चोखे पाय।
जो तन के चोखे मिले, धोका उनसे खाय।।
-विशाल कड़ा “मांझी”,बडोराघाट
8
कल्लू करिया कृष्ण खों, कहें कनौड़े लोग।
मुख छब देखन दै रईं, गोपीं माखन भोग।।
-श्यामराव धर्मपुरीकर,गंजबासौदा
9
गोरौ नारौ आदमी,पर कल्लू है नाव।
मिलवा देहें आपखों,घरै कबहुं तुम आव।।
-वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
10
राम श्याम हैं सांवरे, कल्लू प्यारो रंग।
राधा सीता ऊजरी, रातीं उनके संग।।
-डॉ.रेणु श्रीवास्तव, भोपाल
11
मथुरा तो नोनो लगे,जनम लिओ घनश्याम।
रंगबरन कारो सही,कल्लू धर दओ नाम।।
-रंजना शर्मा,भोपाल
12
नजर न लागे काउ की,आजी देत सुझाव।
चपल सलौने लाल कौ,कल्लू नाव धराव।।
-आशा रिछारिया,निवाडी
13
नाव भौत नोनो लगे,कलुआ नाव हमार।
गांव-शहर व पड़ोस में, नाव के दस हजार।।
-निजाम अली,टीकमगढ़
14
कल्लू मेरे श्याम जू, कल्लू मेरे राम।
दोनों के मन ऊजरे, सब जग करै प्रणाम।।
-अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
15
रंग चढ़ा लो श्याम कौ,दुर्गुन धो लो छैउ।
कल्लू रँग में डूब कें, भये ऊजरे कैउ।।
-गोकुल प्रसाद यादव,नन्हींटेहरी
16
कल्लू गुन वारे कढ़ें,भूरे भौंदा होंय।
अँदरा गैल टटोल ले,आँखन वारे रोंय।।
-सुभाष सिंघई , जतारा
© संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'