1बुंदेली दोहा प्रतियोगिता -273
दिनांक -20/6/2026
प्रदत्त शब्द- घुटकी
संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़
प्राप्त प्रविष्ठियां-
1
सबकी घुटकी राम जू पकरै रत दिन रैन।
अगर तनक गड़बड़ करी,मसकै परै न चैन।।
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-शोभाराम दा॔गी इ॑दु न॑दनवारा
2
आशुतोष भगवान ने,करो बड़ौ उपकार।
कलश हलाहल विष भरो,घुटकी लओ उतार।।
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-आशा रिछारिया निवाड़ी
3
भजन करौ श्री राम कौ, छोडौ जग जंजाल।
दो दिन की है जिंदगी, घुटकी पकरें काल।।
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- डॉ. देवदत्त द्विवेदी बड़ामलहरा
4
गलत काम जो भी करत, रत घुटकी में प्रान।
जीवन भर रक्षा करत, साजे की भगवान।।
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-अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
5
घुटकी-घुटकी पीत हैं, मेहनत को परसाद।
पसीना मिल कै रोटिया, लागैं अमृत स्वाद॥
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- डॉ. महावीर, पूर्णिया
6
चरनामृत परसाद लै, केवल उतनो खाय।
घुटकी लौ होबे खतम, और स्वाद मिल जाय।।
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-अमर सिंह राय, नौगांव
7
मसकौ घुटकी काउकी, तुरंत निकल जे प्रान।
बचकैं रैंजो पाप सें, माटी मिलजै शान।।
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- वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
8
घुटकी दाबत बाप की, जीते जी औलाद।
अँसुआ ढारत बैठ खैं, फिर मरबे के बाद।।
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-तरुणा खरे'तनु' जबलपुर
9
ढुलमुल सरकारें चलें, पेपर लीक करायँ।
बेरुजगारन की बुरइ, घुटकी आज दबायँ।।
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-एस आर सरल, टीकमगढ़
10
घुटकी भोलेनाथ नें, धरौ हलाहल ऐंन।
नीलकंठ बे हो गये, परौ देवतन चैंन।।
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- रामानंद पाठक 'नंद' नैगुवां
11
असबस में हो आदमी,फसतइ घुटकी प्रान।
उगले ना लीलत बनत,रत भारी हैरान।।
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-सुभाष सिंघई, जतारा
12
घुटकी मसक गरीब की, लेत धनी बेगार।
सुख सें कबउँ नसीब कब, सोवै पाँव पसार।।
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-श्यामराध धर्मपुरीकर,गंजबासौदा
©संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़