• 04 July 2026

    बुंदेली दोहा प्रतियोगिता 275 के श्रेष्ठ दोहे

    बुंदेली दोहा -कुबढ़ाई

    0 1

    बुंदेली दोहा प्रतियोगिता-275
    दिनांक-4.7.2026
    प्रदत्त शब्द-कुबढाई (बुराई)

    संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
    आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़

    प्राप्त प्रविष्ठियां:-

    1
    गुस्सा लालच वासना, करत बुद्धि खों भ्रष्ट।
    कुबड़ाई कर नर खुदइँ,मोल खरीदत कष्ट।।
    - अमर सिंह राय नौगांव

    *2*

    दुनियाॅं भर में हो रही,कुबढ़ाई चहुॅं ओर।
    चंदा खा गयॅं राम कौ, द‌इ मर्यादा टोर।।
    *
    -भगवान सिंह लोधी 'अनुरागी',हटा
    *श3
    कुबड़ाई कर देस की,करै॑ बिपकछी घात।
    नुकता छीनी जे करै,कछू लुअर नै पात।।
    *
    -शोभाराम दा॔गी "इ॑दु", नदनवारा
    *श4
    उनके चरन पलोटियौ,करियौ ना कुबड़ाइ।
    आयँ सजीवर देवता ,अपने बाप मताइ।।
    *
    - प्रभुदयाल श्रीवास्तव पीयूष टीकमगढ़
    5
    कुबढाई किततउ बड़ी, खुलजे ऊकी पोल।
    गुन साजे गर साधु के, ऊको भोतइ मोल।।
    *
    -विशाल कड़ा “मांझी”,बडोरा घाट
    6
    कुबढ़ाई कै घात सें,घर में परी दरार।
    तितर बितर भइ एकता,उजड़ गओ परवार।।
    *
    -विद्या चौहान, फरीदाबाद
    7
    कुबढ़ाई करते नही,जिनके नेक विचार।
    राम-राम करते चलो, स्वारथ का संसार।।
    *
    -प्रमोद मिश्रा बल्देवगढ़
    8
    विप्र धेनु सुर संत हित,कैैकइ भइँ बदनाम
    जग में कुुबढ़ाई सही,वन भेजे श्री राम।।
    *
    -आशा रिछारिया निवाड़ी
    9
    कुबढ़ाई कर कूबड़ी, कैकइ दइ भड़कांय।
    राम राज खों छोड़ के, सांसउ वे वन जांय।।
    *
    -डॉ.रेणु श्रीवास्तव,भोपाल
    10
    कुबढ़ाई में जिंदगी, सबरी गई तमाम।
    सांसें सबरी भइ वृथा, रसना भूली राम।।
    *
    -श्यामराव धर्मपुरीकर,गंजबासौदा
    11
    कुबढ़ाई हर बात में , खूब निकारत ‌लोग।
    हूँका देबे भी जुरत,जिनखौ चुगला रोग।।
    *
    -सुभाष सिंघई,जतारा
    *श12
    आदत ज कुबढाई की,जलदी तो तुम छोड़।
    ननतर कोंनऊँ एक दिन,मुनडी दैहै फोड़।।
    *
    - वीरेन्द्र चंसौरिया टीकमगढ़
    13
    कुबढ़ाई की बेलिया, आँगन लेय पसार।
    नेकी कै पानी बिना, सूखत घर-परिवार॥।
    *
    - डॉ. महावीर पूर्णिया
    14
    कुबढा़ई पीछे करें, आगे मीठे बैन।
    सजग रएं जा नरन तें, दूरय रहबे चैन।
    *
    - रामलाल द्विवेदी, कर्बी
    15
    कुबडाई में भी भलौ, छिपौ रहत है ऐंन।
    दासी दोस लगाय कें, परौ देवतन चैंन। ।
    *
    - रामानंद पाठक 'नंद' नैगुवां,
    16
    कुबढ़ाई श्री राम की, करै कूबडी रोज।
    कारण कैकेई बनी, मिटौ अवध कौ खोज।।
    *
    - अंजनी कुमार चतुर्वेदी निबाड़ी
    17
    बउअन की कुबड़ाइ तौ, कबउँ करौ नै यार।
    तुमरे घर आ जात है, छोड़ कुटुम परिवार।।
    *
    -तरुणा खरे 'तनु', जबलपुर

    © संयोजक राजीव नामदेव 'राना लिधौरी'
    आयोजक जय बुंदेली साहित्य समूह टीकमगढ़



    राजीव नामदेव राना लिधौरी


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