6समझने में जो समय लगा है।
यही वजह है शब्द मिला है।
शब्द के मिलने से, कविता बन पडा।
हर पंक्ति नया शब्द हो मन कह अडा।
शब्दों के दीप फिर जला है।
शब्द मिलते फिर गए, बहुत खुशी हुई।
एक के स्थान पर, अनेक नई नई।
जिन शब्दों से हुआ मेरा भला है।
अब तो शब्द बहुत करीब हैं पडे़।
कभी उनको याद करता वे अडे़।
आया मुझमें इस तरह का कला है।
गिरधारी लाल चौहान
सक्ती छत्तीसगढ़