"किराये का घर" एक सामाजिक और भावनात्मक ई-पत्रिका है, जो उन करोड़ों किरायेदारों की आवाज़ बनने का प्रयास करती है, जो हर दिन बढ़ते किराये, महंगाई, बिजली के बढ़ते बिल, बेरोज़गारी, आर्थिक तंगी और अपने घर के अधूरे सपने के साथ जीवन जी रहे हैं।
इस ई-पत्रिका का उद्देश्य केवल समस्याओं का वर्णन करना नहीं, बल्कि समाज और सरकार का ध्यान उन वास्तविक चुनौतियों की ओर आकर्षित करना है, जिनका सामना किरायेदार परिवार वर्षों से करते आ रहे हैं। इसमें किरायेदारों के संघर्ष, अनुभव, दर्द, उम्मीदें और बेहतर आवास व्यवस्था की आवश्यकता को संवेदनशील और प्रभावशाली शब्दों में प्रस्तुत किया गया है।
"किराये का घर" हर उस व्यक्ति को समर्पित है, जिसने कभी किराये के मकान में रहकर जीवन की कठिनाइयों को महसूस किया है और जो आज भी अपने छोटे-से आशियाने का सपना संजोए हुए है।
— लेखक : Mk